केन्द्र सरकार कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर खर्च करेगी 1 लाख करोड़ रुपए:कटारिया - Discovery Times

Breaking

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Saturday, October 3, 2020

केन्द्र सरकार कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर खर्च करेगी 1 लाख करोड़ रुपए:कटारिया

कुरुक्षेत्र 3 अक्टूबर (अनिल धीमान ): केन्द्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री रत्न लाल कटारिया ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार किसानों की हितैषी है और हमेशा रहेगी। केन्द्र सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को ओर अधिक मजबूत करने के लिए 500 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया है। इतना ही नहीं देश में कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया है। इस सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और फसलों को देश के किसी भी कोने में बेचने के लिए कृषि बिलों के रुप में स्वतंत्रता का अधिकारी दिया है। इन बिलों से किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे, लेकिन विपक्ष इन बिलों को लेकर केवल राजनीति करने का काम कर रहा है।

केन्द्रीय राज्यमंत्री रत्न लाल कटारिया शनिवार को देर सायं सर्किट हाउस में कृषि बिलों को लेकर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने किसानों के नाम पर केवल राजनीति करने का काम किया है और विपक्ष की सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में कृषि के लिए केवल 8.5 प्रतिशत कृषि बजट के रुप में खर्च किया। लेकिन भाजपा सरकार ने महज 6 सालों में 38.8 प्रतिशत बजट किसानों पर खर्च करने काम किया। जो विपक्षी दल एमएसपी दुहाई दे रहे है, उन विपक्षी दलों ने 50 सालों में कृषि और कृषकों के लिए कुछ नहीं किया। इस देश में केवल 6 प्रतिशत फसल एमएसपी पर खरीदी जाती है जबकि 94 प्रतिशत फसल किसान बाहर बेचने पर मजबूर है। विपक्ष ने 10 सालों में एमएसपी में नाममात्र की बढौतरी की है, लेकिन भाजपा सरकार ने अपने 6 साल के कार्यकाल में गेंहू का 41 प्रतिशत, चावल पर 45 प्रतिशत और दालों पर 65 प्रतिशत एमएसपी बढ़ाने का काम किया है। विपक्ष ने अपने 10 साल के कार्यकाल में किसानों को 3.5 लाख करोड़ एमएसपी दिया, जबकि भाजपा ने 6 साल में एमएसपी के रुप में 7 लाख करोड़ रुपए देने का काम किया है। इसलिए देश और प्रदेश में एमएसपी है, रहेगा और प्रतिवर्ष एमएसपी बढ़ता रहेगा।

केन्द्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने 6 सालों में किसानों को 16 लाख 38 हजार करोड़ रुपए ऋण के रुप में दिया, लेकिन विपक्षी दलों ने सरकार के जनधन, 8 करोड़ महिलाओं को गैस कनैक्शन, ढाई करोड़ लोगों को घर, राफेल खरीद, आधार बिल, नोटबंदी, जीएसटी, जैसे बड़े फैसलों का विरोध करने का काम किया। जहां सारा विश्व महामारी से जूझ रहा है वहीं विपक्षी दल बिना वजह और बिना मुद्दों के राजनैतिक रोटियां सेक रहे है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में विपक्षी दलों ने न केवल कृषि बिलों की प्रति, नियमों की प्रति फाडऩे का काम किया वहीं, डिप्टी चेयरमैन के साथ धक्का-मुक्की करने का भी काम किया। इसलिए कहा जा सकता है कि विपक्षी दल किसानों के हितैषी नहीं अपितू किसानों के नाम पर किसानों को कंधा बनाकर राजनीति करने काम कर रहे है। केन्द्र और हरियाणा की प्रदेश सरकार ने एक साल में गेंहू, धान, बाजरा, 14 लाख किसानों के खाते में 6 हजार रुपए प्रतिवर्ष जमा करवाने, बोनस, सबसीडी आदि सुविधाओं पर 81 हजार करोड़ रुपए खर्च किया है। इतना ही नहीं केन्द्र सरकार ने पिछले वर्ष पंजाब की सरकार को गेंहू खरीदने के लिए 32 हजार 58 करोड़ रुपए देने का काम किया, जबकि हरियाणा सरकार ने पिछले वर्ष धान की खरीद के लिए 14 हजार 642 करोड़ धान खरीदने के लिए खर्च किए।

उन्होंने कहा कि कृषि बिलों में किसानों की जमीन छिन जाएगी, इस प्रकार का प्रचार विपक्षी दल कर रहे है, लेकिन इन तीनों कृषि कानूनों के अनुसार किसानों की जमीन का सूई की नोक जितना हिस्से पर भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इन बिलों का सम्बन्ध केवल किसान मंडी में, देश के किसी भी हिस्से में या कम्पनी के साथ समझौता करके निर्धारित दरों पर फसल बेच सकते है। अगर कम्पनी समझौता तोडऩे पर दोषी पाई गई तो कम्पनी के मालिकों को दो साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन फिर भी किसानों को न्यूनतम लागत मुल्य को देना ही होगा। सरकार किसानों के दरवाजे तक फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहती है ताकि विदेशों में किसानों का उत्पाद बिक सके और इससे देश की जीडीपी में इजाफा हो सके। उन्होंनेे जल शक्ति मंत्रालय की योजनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि देश की 17 प्रतिशत आबादी (विश्व की जनसंख्या के अनुसार) के लिए 4 प्रतिशत पानी है। इसमें से 87 प्रतिशत पानी धान, गेंहू जैसी फसलों पर खर्च हो रहा है, 7 प्रतिशत उद्योगों पर और 4 प्रतिशत पानी 130 करोड़ लोगों के लिए बचा है। इस देश में 1 किलो चावल पैदा करने पर 3500 लीटर पानी खर्च हो रहा है। इसलिए सही फसल कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पानी बचाने के प्रति जागरुक किया जा रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि हरियाणा प्रदेश में फसल विविधिकरण को प्रोत्साहन मिला है और सरकार ने मक्का की फसल लगाने के लिए 7 हजार रुपए प्रति एकड़ देने का काम किया और 1 लाख हेक्टेयर में मक्का लगाने के लक्ष्य को पूरा किया। उन्होंने पत्रकारों के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हाथरस के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी सख्त एक्शन ले रहे है, दोषियों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में एसआईटी जांच कर रही है और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी। उनका मानना है कि ऐसे दरींदों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। इस मौके पर सांसद नायब सिंह सैनी, भाजपा के जिलाध्यक्ष राजकुमार सैनी, भाजपा प्रदेश महिला उपाध्यक्ष बंतो कटारिया, महामंत्री सुशील राणा, विनित क्वात्रा, विजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र माजरी, जिला समाज कल्याण विभाग के लेखाकार भारत भूषण सहित अन्य अधिकारीगण और भाजपा नेता मौजूद थे।

"किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए केन्द्र सरकार ने किया 500 करोड़ रुपए का प्रावधान, राज्य सरकार ने पिछले साल धान खरीदने पर खर्च किए 14642 करोड़, केन्द्र व राज्य सरकार गेंहू, धान, बाजरा की फसलों पर बोनस और सबसीडी के रुप में खर्च कर रही है 81 हजार करोड़ रुपए, किसानों को हमेशा मिलता रहेगा फसलों पर एमसपी, केन्द्र सरकार ने 6 सालों में किसानों को ऋण के रुप में दिए 16 लाख 38 हजार करोड़, भाजपा सरकार ने 6 सालों में किसानों को एमएसपी देने पर खर्च किए 7 लाख करोड़ रुपए, कृषि बिलों से होगी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत, विपक्ष कर रहा है कृषि बिलों पर राजनीति"

ओडीएफ में हरियाणा को देश में मिला प्रथम पुरस्कार

केन्द्रीय राज्यमंत्री रत्न लाल कटारिया ने कहा कि राष्टपिता महात्मा गांधी के जयंती समारोह 2 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान से सम्बन्धित 35 पुरस्कार दिए गए। इन पुरस्कारों में हरियाणा को ओडीएफ के लिए देश में प्रथम पुरस्कार मिला। इस पुरस्कार को उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने हासिल किया है।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Responsive Ads Here